Sunday, May 26, 2024
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मां के जैसा कौन हैं…मां के सम्मान में छोटी सी विनती (Happy Mother’s Day)

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Happy Mother’s Day!!

मां का क्या गुणगान करूं शब्द कम पड़ जाते हैं..

 जमीं आसमां नदी समंदर सारे सिर झुकाते हैं…..

Mother's Day

 दोस्तों…सागर है मां का अस्तित्व मां (mother)के जैसा संसार में कोई नहीं हो सकता है ना कभी होगा. लोग कहते हैं भगवान हर जगह पर नही आ सकते,देखभाल नहीं कर सकते, इसलिए उन्होंने मां(mother) की रचना की है.

 मां(mother) बनाई है,जिसके अस्तित्व में सब कुछ समा जाए.माँ (mother)वह शब्द है, जो लाजवाब है जिसका कोई जवाब नहीं है, मां के बदले में इस संसार में.

mother's day

 क्या कुछ नहीं करती है हमारी मां अपने बच्चों के लिए, बचपन से लेकर जवानी तक यहां तक कि, हम सब अपनी माँ के सामने बूढ़े हो जाते हैं तब भी वह कुछ ना कुछ करते रहने का प्रयत्न करती है हमारे लिए.

 हमें बचपन में नहलाना धुलाना साफ सफाई क्या नहीं करती है वह. बचपन में हाथ पकड़कर चलाती हैं,गिर जाने पे उठा देती है और रोने पर गले लगाकर चुप कराती हैं.

 यह माँ है दोस्तों! इन सबको करके कभी उसने कुछ बदले में अपने लिए मांगा क्या? …मांगा हो तो जरा ध्यान करके बताइये.

 मुझे तो ऐसा कुछ ध्यान भी नहीं है कि,बचपन में जब माँ ने यह सब किया तो बदले में मुझसे कुछ मांगा हो.

 हमें पढ़ाती है,लिखाती है,समझाती है और हमें बड़ा करती है. वह हमारे कहीं भी बाहर जाने पर चिंता करती है हमारी राह तकती है और हमारे वापस आने का इंतजार करती हैं.

 क्या-क्या कहू मां के बारे में कुछ समझ में नहीं आता है. बदले में क्या दिया जाता है मां को.

 और आजकल के बच्चे…अपनी मां को दुत्कारते हैं फटकारते हैं यानी उन पर चिल्लाते हैं,कई तो ऐसे भी होते हैं जो अपनी मां पर हाथ उठाने से भी नहीं चूकते हैं और फिर अपनी मां को घर से भी निकाल देते हैं. बहुत गलत है ये!!

 और जब उन को हमारी सबसे ज़्यादा ज़रूरत होती है यानी कि वृद्धावस्था में, ठीक हमारे बचपन की तरह जैसे हमें उनकी थी, पर हम उन्हें छोड़ देते हैं और भूल भी जाते हैं उसका सब कुछ किया हुआ.

 हर उस बेटे को समझना चाहिए जिसके लिए मां की ममता सम्मान और उसकी जरूरत मायने नहीं रखती है.उसने पाल-पोस कर अपने बच्चों को बड़ा किया है आपको इस काबिल बनाया है कि आप अपने परिवार का भरण पोषण कर सकें.

 जब आप अपने बीवी और बच्चों का भी ख्याल रख सकते हैं तो उसका क्यों नहीं? सब उसी मां की बदौलत तो है.

 समझिए इस चीज को.. जिसने आपको काबिल बनाया उसी के लिए कुछ क्यों नहीं है आपके पास.

 बुढ़ापे में उसके कोई शौक सिंगार तो होंगे नहीं.. न ही क्षमता होती है कि ज़्यादा खा-पी सकें. खाना पीना भी एकदम सादा-सिंपल सा हो जाता है.फिर भी आप बच्चों का अपनी मां को ना निभा पाना सचमुच सही है क्या आपकी नजरों में?

 आपने अपने परिवार के खातिर अपनी मां(mother) को छोड़ दिया और उन्हें वृद्ध-आश्रम में छोड़ आये.

Mother's Day

क्या इसी दिन के लिए आप के जन्म पर वो पागलों की तरह बहुत खुश हुई थीं,नहीं! बिल्कुल भी नहीं,उन्होंने तो शायद ऐसा सोचा भी न होगा कि जिस बेटे के लिए इतना खुशी मना रही हैं.वही बेटा उनके बुढ़ापे में उनको बहुत दुख देगा.

  ऐसा ना करें प्लीज मां का आदर तथा सम्मान करें..वो भी सम्मान चाहती है आपका दिया सम्मान उसका दिल बहुत बड़ा कर देगा.अगर कभी उसने कुछ कह भी दिया या डांट भी दिया तो क्या हुआ वह मां है आपकी.

 गलतियां ना देखें बल्कि उसका सम्मान करें. उनको प्यार की दो रोटी और उसकी दवा वगैरह का ख्याल रखिए. माँ भी फिर आपको हजारों आशीष और दुआएं देंगी और वो आपके काम आएँगी. खुद ये बात समझिए और अपने बाकी परिवारवालों को भी यही समझाइए.

  ऐसा नहीं है कि दुनिया में सारे ही बेटे खराब होते हैं.मैंने कुछ ऐसे बेटे भी देखे हैं,जो भगवान से ज्यादा माँ को पूजते हैं, मां की डांट फटकार अपने जवान या बड़े बच्चों के सामने भी सुन लेते हैं और हंसते हैं.

किसी को कुछ कहने नहीं देते हैं कहते हैं “ये मेरी माँ हैं, इनको पूरा अधिकार है”,जो ये कहते हैं बहुत भाग्यशाली हैं हम कि हमें ऐसी मां मिली हमारी मां हमारे सामने हैं.

 भाग्यशाली है वह मां(mother) जिनको ऐसे बेटे मिले हैं, जिनके लिए आज भी पहले नंबर पर सिर्फ मां है बाकी सब बाद में.

 नमन है ऐसे बेटों को……

 कभी उनसे पूछिए जिनके पास मां(mother) नहीं है जो मां की और मां की ममता को तरसते हैं जिन्हें चाहत होती है कि काश हमारी मां भी होती.

  और हर बेटे को समझना चाहिए.जो मां के साथ बुरा व्यवहार करते हैं.आपके आस पास अच्छे बेटों के भी बहुत सारे उदाहरण हैं, उनसे कुछ सीखिए तथा समझिए, फिर संभालिए.गलती भी हो जाए तो उसे माफी मांग कर सुधारें.

  प्लीज वृद्धावस्था में अपनी मां का ख्याल रखें ना कि उन्हें वृद्धा आश्रम में छोड़ कर आएं,उन्हें कभी भी ना छोड़े..अगर गुस्से में या फिर हंसी में वो कुछ कह दे तो बुरा ना माने धैर्य और संयम रखें.ठीक उसी तरह से व्यवहार करें जैसे आपके बच्चे गलती करते हैं और आप डांटने की जगह हंसकर बालक समझकर टाल देते हैं.

  उनके खाने-पीने का,उनकी दवाइयों का ख्याल रखें. अपनी मां(mother) को भी उतना ही प्यार करें जितना अपने परिवार से करते हैं आप.

 बहुत-बहुत धन्यवाद !! 🙏🙏🙏🙏🙏

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